*एक गलती-एक पहचान*


एक छोटे से गाँव के मध्यम वर्गीय परिवार की एक छोटी सी लड़की जिसका नाम भोली था, देखने में बहुत ही सुंदर थी। उसके गोरे रंग, लम्बे कद, घने और काले बालों की हर कोई प्रशंसा करता था। भोली न केवल देखने में सुंदर थी, बल्कि पढने में भी बहुत होशिआर थी। वह हर वर्ष अपनी कक्षा में अव्वल आती थी। पढाई के साथ—साथ भोली की रूचि घर के काम-काज में भी थी। स्कूल की छुट्टी के बाद घर आ कर वह अपनी माँ की  खाना बनाने व सिलाई-बुनाई में मदद करती थी।

एक दिन भोली के घर पर चाय-नाश्ते का कार्यक्रम था। भोली के सभी मित्र व रिश्तेदार उसके घर आये। हसी-ख़ुशी का माहौल था। सभी रिश्तेदार एक-दुसरे से बातें कर रहे थे और बच्चे खेल-कूद में व्यस्त थे। तभी चाय-नाश्ते के लिए सभी को आमन्त्रित किया गया। भोली ने जैसे ही चाय का प्याला उठाया, कुछ शरारती बच्चो द्वारा प्याला छलक गया और गर्म-गर्म चाय भोली के चेहरे पर गिर गई। भोली के माता-पिता उसे तुरंत अस्पताल ले गए जहाँ उसका इलाज शुरू हुआ।

समय के साथ-साथ भोली ठीक हो गई और अपने घर वापस आ गई। घर आकर जब भोली ने अपने चेहरे को शीशे में देखा तो उसके चेहरे पर गर्म चाय से जलने के कारण बने दाग-धब्बो ने उसके अन्दर हीन भावना पैदा कर दी। भले ही भोली का शारीरिक दर्द ठीक हो गया था पर उसके अन्दर का दर्द और हीन भावना दिन प्रति दिन बढती ही जा रही थी।

समय गुजरता गया और समय के साथ भोली ने अपने आप से समझोता करना सीख लिया। उसने मान लिया कि अब यही चेहरा उसकी पहचान है जिसे वह कभी ठीक नहीं कर सकती। कुछ वर्षो बाद भोली बड़ी हो गई और उसकी सभी सहेलियों की शादी हो गई। भोली के माता पिता अब बहुत ही परेशान थे क्यूँकि भोली के चेहरे पर गर्म चाय गिरने के कारण बने दाग-धब्बो को देख कर उसको कोई पसंद नहीं करता था। भोली के माता पिता के पास इतने पैसे भी न थे कि वह उसे शहर ले जाकर किसी बड़े डॉक्टर से उसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करवाते। जिस समय भोली के माता पिता उसकी शादी के लिए बहुत परेशान थे तब भोली सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थी। उसने परिश्रम कर सिविल सर्विसेज की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की। भोली के घर उसके रिश्तेदारों और गाँव वालो की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी लोग जिन्होंने भोली के साथ शादी के लिए मना कर दिया था वह भी उसकी कामयाबी देख उस से शादी करने के लिए तैयार हो गए पर अब भोली ने जीवनभर अविवाहित रहने का फैसला कर लिया था।

भोली के माता पिता का उसे दुल्हन के रूप में देखने का सपना तो पूरा न हो सका परन्तु भोली ने उनकी चिंता दूर करने का जो उपाय किया वो सच में काबिल-ए-तारीफ था।

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