*भाई के लिए*

बात कुछ साल पहले की है, प्रिया नाम की एक छोटी-सी लड़की जब अपने आस पड़ोस के बड़े बच्चो को स्कूल जाते देखती तो अपने पापा से रोज़ पूछती:-

प्रिया: पापा मैं स्कूल कब जाउंगी……….?

पापा: बस अब तुम्हारा भी दाखिला करा देंगे।

अगली सुबह वह पापा के साथ स्कूल गई जहाँ अध्यापक ने उसका टेस्ट लिया, प्रिया ने सभी सवालों के जवाब सही दिए क्यूँकि उसके पापा उसे घर पर पहले से ही पढ़ाया करते थे।

स्कूल जाने का सिलसिला शुरू हुआ। प्रिया के पापा उसे रोज़े सुबह “सुनो लाल अब आँखें खोलो अपनी लाया अब मुँह धो लो” गीत गा कर जगाया करते थे। स्कूल का पहल दिन था और प्रिया बहुत ही खुश थी क्यूँकि वो जानती थी कि अब स्कूल में उसके नए दोस्त बनेंगे जिनके साथ वो खेलेगी और पढाई करेगी। प्रिया और भी कई बातों के लिए बहुत ही उत्सुक थी। कुछ ही दिनों में प्रिया के नए दोस्त बन गए।

एक दिन राखी का त्यौहार आया, प्रिया की एक सहेली ने उसे राखी के त्यौहार पर उसके भाई द्वारा मिला हुआ उपहार दिखाया जिसे देख प्रिया बहुत ही खुश हुई और सोचने लगी काश मेरा भी कोई भाई होता तो मुझे भी राखी के त्यौहार पर उपहार मिलता। उस दिन स्कूल की छुट्टी होने के बाद प्रिया ने घर आकर अपनी माँ से पूछा “माँ मेरा भाई कब आएगा” पर माँ के पास प्रिया के इस सवाल का कोई जवाब न था।

कहते है भगवान बच्चों की जल्दी सुनता है और शायद ये सच भी है, तभी वो दिन जल्दी ही आ गया जब प्रिया का भाई आने वाला था। कुछ महीनो बाद जब प्रिया के भाई का जन्म हुआ तब वह बहुत छोटी थी और उसके पापा की मदद करने के लिए हॉस्पिटल में कोई न था। प्रिया के पापा ने अपने एक पुराने पडोसी से मदद मांगी जिन्होंने अपना हाथ ख़ुशी-ख़ुशी आगे बढाया। एक दिन प्रिया के अंकल उसके माता-पिता के लिए हॉस्पिटल में खाना ले जा रहे थे तभी प्रिया ने बड़ी ही मासूमियत से पूछा……………..

प्रिया:  अंकल मेरा भाई घर कब आएगा?

अंकल : तुम्हारा भाई ………..? वो कल घर आएगा………… ।

प्रिया :  ठीक है।

अगले दिन सुबह प्रिया बहुत ही खुश थी कि क्यूँकि उसका भाई घर आने वाला था। वह फटाफट स्कूल के लिए तयार हुई और स्कूल में सभी दोस्तों को बताया कि आज मेरा भाई घर आएगा। प्रिया बस पूरा दिन छुट्टी होने का ही इंतजार कर रही थी। वह इतनी छोटी और मासूम थी कि उसने स्कूल से मिली हुई मीठी रोटी स्वंय नहीं खाई बल्कि अपने भाई के लिए डिब्बे में डाल कर घर ले गई। प्रिया जैसे ही घर पहुंची उसने अपने भाई को देखा और उसे प्यार किया। वो बहुत ही खुश थी पर जब उसने अपनी माँ को स्कूल से मिली हुई मीठी रोटी दी और बोला:-

प्रिया : माँ यह मीठी रोटी मैं भाई के लिए लेकर आई हूँ। इसे भाई को खिला दो।

माँ: नहीं बेटा ……..!! डॉक्टर ने भाई को बाहर की कोई भी चीज़ खिलाने से मना किया है (माँ शायद उसे समझा न पाई कि छोटे बच्चे ६ माह तक सिर्फ और सिर्फ माँ का दूध ही पीते हैं)

प्रिया: मैं इतने प्यार से भाई के लिए ये मीठी रोटी लाई थी और आप इसको खिलाने से मना कर रहे हो …..? (बडे ही गुस्से में वह अपना स्कूल बैग फेंक देती है और वहां से चली जाती है)

कुछ सालो बाद ……………………..

प्रिया अब बड़ी हो गई थी और शायद इस बात को भी समझ गई थी कि उसके दवारा लाई हुई मीठी रोटी भाई को खिलाने से माँ ने क्यों मन किया था। प्रिया को जब भी मासूमियत से भरा अपना ये किस्सा याद आता तब उसके चेहरे पर छोटी की मुस्कान आ जाती। प्रिया अब हर वर्ष अपने भाई को राखी बांधती और भाई से मिले उपहार को पाकर बहुत ही खुश होती।

Advertisements

2 thoughts on “*भाई के लिए*

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s