*गूंजा का गहना*

यह कहानी करीब तीस वर्ष पुरानी है। एक गाँव में गूंजा नाम की एक लड़की रहती थी। उसका एक बड़ा भाई और तीन छोटी बहनें थी। बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण गूंजा को बचपन में ही जिमेवारियों ने घेर लिया।
हालाँकि गूंजा अपने भाई से छोटी थी, परन्तु लड़की होने के कारण उसका विवाह सबसे पहले पास के ही एक गाँव में हो गया। जिस समय गूंजा का विवाह हुआ उस समय वह केवल सोलह बरस की थी। गूंजा को विवाह के समय ससुराल वालों की तरफ से एक गहना मिला, जो उस समय सभी लोग अपनी नई-नवेली बहु को दिया करते थे, जिसे पाकर गूंजा बहुत ही खुश हुई।
गूंजा के विवाह को दो वर्ष बीत चुके थे। वह बहुत ही खुश थी और सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था। एक दिन गूंजा के माता-पिता उसके ससुराल अपने बड़े बेटे के विवाह का न्योता लेकर आये। गूंजा खुश थी क्यूँकि वह अपने भाई-बहनों से मिलने वाली थी। अब वह दिन-रात उस दिन का इंतजार करती थी जब उसके बड़े भाई के विवाह होना था।
भाई के विवाह से दो दिन पूर्व ही गूंजा और उसका पति उसके गाँव के लिए रावाना हुए। अपने घर पहुँच कर जब वह अपने भाई-बहनों से मिली, तब वह बहुत ही खुश हुई। उसके घर में चहल-पहल और हसी-ख़ुशी का माहौल था।
अगले दिन सभी को गणेश पूजा के लिए सुबह चार बजे उठना था। सुबह-सुबह चार बजे सभी लोग गणेश पूजा के लिए तैयार हुए। गूंजा ने भी नई साडी पहनी और वही गहना पहना जो उसे अपने ससुराल से मिला था। गणेश पूजा का शुभारंभ हुआ और पंडित जी ने श्लोक पढ़ने शुरू किये। गणेश पूजा के समापन के बाद गूंजा थोड़ी थक गई थी और उसे नींद आने लगी। वह अपने कमरे में गई और थोड़ी देर सो गई। कुछ पहर बाद जब गूंजा की आँख खुली और उसने सामने लगे शीशे में अपने आप को देखा तो वह बहुत परेशान हो गई। उसकी इस परेशानी का कारण उसके गले में गहने का न होना था। वह बहुत घबरा गई और सोचने लगी कि अब वह अपने पति को क्या कहेगी….? बिना गहने अपने ससुराल वापके कैसे जाएगी…..? उसने सबसे पहले यह बात अपनी माँ को बताई। उस समय लोग पुलिस के पास न जाकर ज्योतिष या किसी बाबा के पास जाते थे। गूंजा और उसकी माँ भी एक बाबा के पास गए और सारी बात बाबा को बताई। बाबा ने कुछ सोचा और बताया कि गूंजा का गहना उसके ही गाँव की एक पंद्रह वर्ष की लड़की ने चुराया हैं, जो चोरी वाले दिन गूंजा के साथ सोई थी। वह दोनों बाबा को धन्यवाद कर घर वापस आ गए और उस लड़की के पास गए जिसके बारे में बाबा ने बताया था। सभी गाँव वालों को जब इस बात का पता चला तो सभी वहां आ गए। गाँव वालों की भीड़ को देखकर लड़की घबरा गई और गहने के बारे में पूछने पर बोली मुझे “गूंजा दीदी का गहना बहुत अच्छा लगा और जब वह सो रही थी तभी मैंने वो गहना चोरी कर लिया“ उस लड़की ने सभी गाँव वालों की मौजुदगी में गूंजा को उसका गहना वापस किया तब जाकर गूंजा की जान में जान आई।
विवाह समारोह के समाप्त होते ही गूंजा और उसका पति सभी से विदा लेकर अपने घर वापस चले गए। इस बात के बारे में शायद ही गूंजा के ससुराल वालों को पता हो पर उसे इस बात घटना से एक बड़ी सिख मिल गई थी।

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