*दोस्त दोस्त ना रहा – भाग 2*

कामिनी और निशा की दोस्ती का वो आखिरी दिन था जब कामिनी ने निशा का साथ न दिया। निशा अब कामिनी से बात नहीं करती थी, यहाँ तक की लंच के समय जब कामिनी के साथ उसका सामना होता तब वह अनजान शख्स की तरह सामने से गुजर जाती। दोनों को इस बात का अफ़सोस था कि उनकी दोस्ती अब नहीं रही और कहीं न कहीं दोनों ख़ुशी के अवसर पर एक-दुसरे को याद करते।

देखते-ही-देखते दोनों ने इंटर की परीक्षा अच्छे नम्बरों से पास की। निशा और कामिनी ने अब कॉलेज के लिए आवेदन किया। दोनों के अच्छे नंबर होने के कारण उन्हें शहर के श्रेष्ठ कॉलेज में दाखिला मिल गया और दोनों फिर से एक ही क्लास में आ गए। एक ही कॉलेज में और एक ही क्लास में दो अजनबियों की तरह रहना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। रह-रह कर दोनों को अपनी दोस्ती याद आती और बीता हुआ लम्हा जैसे उनकी आँखों के सामने आ जाता। यह जताते हुए कि दोनों को एक-दुसरे की मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ता, पता नही तीन वर्ष कैसे बीत गए………………………..?

अब परीक्षा के दिन नजदीक आ गए थे, दोनों ने तैयारी शुरू कर दी। जहाँ एक तरफ निशा अर्थशास्त्र की छात्रा थी, वही दूसरी तरफ कामिनी राजनीति-शास्त्र की छात्रा थी। परीक्षा की डेट-शीट आ गई थी। दोनों ने दिन-रात एक कर दिया, भले ही वह आपस में बात न करते थे पर एक-दुसरे से स्पर्धा उनमें आज भी थी। कुछ ही दिनों में निशा की परीक्षाएं समाप्त हो गई पर कामिनी की अंतिम परीक्षा बाकी थी और उसी परीक्षा से एक दिन पहले कामिनी के साथ गंभीर दुर्घटना घटी। अस्पताल में डॉक्टर द्वारा जाँच के दौरान हड्डी टूटने के कारण उसके दाहिने हाथ में प्लास्टर लगाया गया। कामिनी बहुत ही चिंतित थी क्यूँकि अगले दिन उसकी परीक्षा थी और अब उसे एक लेखक की जरूरत थी। उसने अपने सभी मित्रों से मदद मांगी परन्तु किसी ने भी उसका साथ न दिया और अंजलि भी शहर से बाहर थी। कामिनी को कुछ समझ नही आ रहा था, वह अपने स्टडी टेबल पर बैठी और अपनी किताबों को देखने लगी, जैसे ही उसने अपने हाथ पर चढ़े हुए प्लास्टर को देखा, यह सोचकर कि कल परीक्षा का क्या होगा…….? उसके आंखो से आंसू छलकने लगे। अब उसके पास केवल निशा का ही सहारा था, परन्तु आत्मग्लानि से भरे हुए हृदय के साथ वह निशा से बात करने की हिम्मत न जुटा पाई, तभी फ़ोन की घंटी बजी और कामिनी ने फ़ोन उठाया …………….

कामिनी: हेल्लो ……………..!!

निशा: हेल्लो कामिनी…. मैं निशा बोल रही रही हूँ…..। मुझे अंजलि ने बताया की तुम्हारा एक्सीडेंट हो गया है और तुम्हें कल की परीक्षा के लिए लेखक की जरूरत है…….? तुम ठीक तो हो न……..?

कामिनी: निशा मुझे उस दिन की गलती के लिए माफ़ कर दो………….

निशा: अरे………कोई बात नहीं, मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है।

कामिनी: कल मेरी परीक्षा है। क्या तुम मेरे लिए लिखोगी?

निशा: हाँ क्यूँ नहीं ….. तुम चिंता मत करो। मै तुम्हारी परीक्षा में सहायता करूंगी। कल सुबह 8:00 बजे मैं परीक्षा भवन के बाहर तुम्हारा इंतज़ार करूंगी…… तुम अपना ध्यान रखना।

कामिनी: धन्यवाद्………..!!!

अगले दिन दोनों परीक्षा के लिए तैयार हुए, निशा ने कामिनी के लिए लेखक का काम किया और अपनी सहेली की मुसीबत में सहायता कर यह साबित किया कि कामिनी के प्रति उसकी दोस्ती में सच्चाई और ईमानदारी थी। निशा ने कामिनी को माफ़ कर उसे गले से लगाया और फिर से वह अच्छे दोस्त बन गए।

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